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होली न0 - 62 (ओ झुकी यो मोरे यार बालुम)

होली न0 - 62  1-ओ झुकी यो मोरे यार बालुम  नैना तोरे - फ़िर झुकियों  2-कौन दिशा से बिजुली आई ,  कौन दिशा रमी जाय बालुम - नैना . . . .  3-पूरब दिशा से बिजुली आई  पश्चिम दिशा रमी जाय बालुम - नैना . . . .  4-इस बिजुली में क्या - क्या है रे -  इक सैया दो यार बालुम - नैना  5 - इस बिजुली में क्या - क्या है रे तबला सरंगी सितार बालुम - नैना . . . . .  6 - इस बिजुली में क्या क्या है रे ।  नीबू नारंगी अनार बालुम - नैना  7-तोरे बालुम नैना तोरे  झकी यो मोरे यार बालम नैना तोरे श्री कुष्ण कन्हया लाल की जै । श्रंगार की होलियाँ होली नं0 - 65 चरचा गो चतु रंग ले बालुम , कोई चरचा गो चतुरंग ले बालुम बडुरेत लाला इत दिल्ली उत आगरा बीच में लाला की छोटी बाजार , लाला जा में बैठे चारो बजार , बड़ना ऐसो झल्ला सो हार हरोलो हरचा गौ जोभन वालो चरचा गो , भय्या चरचा गौ । चतु रंग के बालुम कोई चरचा - गौ नोट : इन होलियों में सिर से पैर तक सिंगार के बोल हैं । होली नं0 - 66 1 - तेरे नैन रसीले यार बालम प्रीति लगाले नैनों से अच्छ हाँ रे बालुम ऐसो बड़ना ला दीजोडीग ...

होली नं0 - 61(अच्छ हाँ रे लाला बिन पिया होली को खेले)

होली नं0 - 61 1-अच्छ हाँ रे लाला बिन पिया होली को खेले  को खेले नदूलाल लला बिन पिया होली को खेले 2- अच्छ हाँ रे लाला कमल फूले तो जल में बसै  चन्दा बसै आकाश , लाला विन . . . . . . .  मेघ जो बरसे धरती गलै , नही बहे पाताल लाला गरमी पड़े तो धूल उड़े ,  गरद उड़े आकाश लाला बिन पिया होरी को खेले -  3-अच्छ हाँ रे लाला चक ही चकवा दोनो जने  इन मत मारो कोई लाला  ये मारे परमेश्वर के रैना  बिछोड़ा होय लाला  बिन पिया होरी को खेले -  को . . . . .  4 - अच्छ हाँ रे लाला चन्द्र मुखी दियड़ा जागे , तन मन हो गई बात लाला  तेल जले तो बाती जलै नाम दिया को होय लाला  जोभन गवायो यारन में नाम पिया को होय लाला  बिन पिया होली .... 5 - अच्छ हाँ रे लाला आम से मीठी अमीली  दाख से मीठी दाडमी ,  चोधन मीठी नैक्यानीमा  सोल बरस की जवान लाला , मेरो दिल पिया में बसै  पिया को दिल मोहे नाही  लाला बिन पिया होली को खेले . . . .  6-अच्छ हाँ रे लाला कौन बसै गड़ आगरा  कौन मुरेदाबाद लाला कौन बसै जल सिगारो  कौन चन्दन चौपाल लाला...

होली नं0 - 60 (बैसाखै मास अब ऋति आगे गर्मी की)

होली नं0 - 60  1-बैसाखै मास अब ऋति आगे गर्मी की - 2 2 - 2- वनज से आये तीन जने हैं तीनों घोड़े  तीन सवार , आगे के तो जेठ हमारे  पीछे देवरिया यार , बीच में बलम हमार  जा में हरियल बाग हरियल बाग की यो बिजना बिजना की बहार - अब ऋतु आगे गर्मी की  3 - कहाँ बसत है जेठ तुम्हारे  कहाँ देवरिया यार कहां बसंत है । बलमा तुम्हारे जा में हरियल बाग । हरियल बाग की यो विजना  बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . 4 - जेठ बसत है ऊँची अटरिया  देवरा चन्दन चौपाल बलमा बसै  मेरो चौ बंगेला जा में हरियल बाग  हरिया कलेकी यो बिजना  बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . . . . . .  5 - काहे की तेरी ऊची अटरिया काहे  को चौपाल काहे को तेरो  चौ बगला जा में हरियल बाग  हरियल बाग की यो बिजना  बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . . . . .  6 - सोने की मेरी ऊची अटरिया  पानन को चौपाल चन्दन को मेरो चौ बगला जा में हरियल बाग  हरियल बाग की यो बिजना  बिजना की बहार - अब ऋतु . .  7 - कोन दिशा तेरी ऊची अटरिया कौन दिशा चो पाल  कौन द...

होली नं0 - 59 (अच्छे हाँ रे भवर भवर बिनोरस करियल से)

होली नं0 - 59 1-अच्छे हाँ रे भवर भवर बिनोरस करियल से  करियल दे हो रंगाय भवरा भवर विनो रस कलियन से  2-अच्छे हाँ रे भवरा छिल विल - वि नदी बहे ,  कौन उतारे पार - भवरा . . . . . .  3-अच्छे हाँ रे काहे की तो नाव बनी  काहे बनो मजधार - भवरा . . . . . .  4-अच्छे हाँ रे भवरा सोने की तो नाव बनी ,  काठ बनो मजधार - भवरा . . . . .  5-अच्छे हाँ रे भवरा काहे को वेटा नाव चढे ,  कौन उतारे पार - भवरा . . . . .  6 - अच्छे हाँ रे भवरा राजा बेटा नाव चढे ,  मलहा उतारे पार - भवरा . . . . .  अच्छे हाँ रे भवर विनोरस कलियन से  करियल दे हो रंगाय भवरा . . . . . 

होली नं0 - 58 (पंख हरे मुख लाल सुवा)

होली नं0 - 58 1-पंख हरे मुख लाल सुवा ।  बो लिया जन बोले बागा में - 2 2 - पूरब बादल रेखड़ी हो रेखड़ी ,  पछिम भयो घनघोर - सुवा . . . . . .  3- कैसो बादल उनानो हो उनानो ,  कैसो बरसै मेघ - सुवा . . . . .  4 - कालो बादल उनानो हो उनानो ,  रीम झिम बरसे मेघा - सुवा . . . . .  5 -उत जन बरसै मेघूला हो मेघूला ,  जिधर पिया परदेश - सुवा . . . . .  6 - मेरी जो भीजै सिर स्योनी हो सिरस्योनी ।  कहाँ पिया की पाग - सुवा . . . . .  7- कहां सुखाऊ सिर स्योनी हो सिरयोनी .  घूप पिया की पाग - सुवा . . . . . वो लिया जन बोले बागा में  पंख हरे मुख लाल सुवा . . . . . .

होली नं0 - 57 (मत जाओ पिया होली आय रही)

होली नं0 - 57 1- मत जाओ पिया होली आय रही  मत जाओ पिया होली आय रही  2 - जिनके पिया नित घर ही रहत हैं ,  उनकी नारी रंग भरी - मत . . . .   3 - जिनके पिया परदेश रहत हैं ,  उनकी नारी उदास रही - मत . . . .  4 - गाई को गोबर अगना लिपो है ,  मोतियन चौक पुरावन में - मत . . . .  5 - फुली गयो टेसु निकशि गयो अम्बा .  मोर जो नाचे वन - वन में - मत . . .  6- फागुन मास होली आवै ,  घर घर साज सजावन में - मत . . . .  7- चैत ही मास बनफल पाके  आम जो पाके सावन में - मत . . .  8-सुन्दर तेल फुलेल लगाऊ ,  मंगल साज सजावन में - मत . . . .  9- फागुन मास होली आवै ,  रंग अबीर छिडकावन में  मत जा ओ पिया होली आय रही । 

होली नं0 - 56 (छन कारो छन कारो छन कारो)

होली नं0 - 56 1 - छन कारो छन कारो छन कारो ,  गोरी प्यारो लगे तेरो छनकारो  2 - तुम हो वृज की सुन्दर नारी ,  मे मथुरा को मतवारो - गोरी . . . . .  3-चूदर चादर सभी रंग भजै ,  फागुन ऐसो मतवारो - गोरी . . . . .  4-सब सखियां मिल खेल रही है ,  दिलवर को दिल न्यारो - गोरी . . . . .  5-अब के फागुन अर्ज करत हू ,  दिल को दे दो दिलवालो - गोरी . . . . .  6 - वृज में धूम मची है होली ,  खेलत सखियां सरमायो - गोरी . . . . .  7-लपकी झपकी मोरी बय्यां मरोरी ,  मारे मोहन पिचकारी - गोरी . . . . .  8 - घुगट खोल गुलाब लगाऊ ,  बनज करत है बनजारो  गोरी प्यारो लगे तेरो छनकारो ।

होली नं0 - 55 (ठाडी जो हेरू बाट मेरो)

होली नं0 - 55  1-ठाडी जो हेरू बाट मेरो ,  सैंया निरमोहिया कब आवै  2- वनज करन पिया वन को सिधारे ,  सात समुन्दर पार मेरो - सैंया . . . .  3- सोच समझू मैं घर में बैठी  पिया गये प्रदेश मेरो - सैंया . . . . .  4- जब से गये पिया घर नही आये ,  हमरो जो मन जाय मेरो - सैंया . . . . .  5-मेरे बालम के अंगना में ,  दाहिनों वोले काग मेरो - सैंयां . . . . .  6-कौन पंन्डीत पातियो लेखे हो पातिया ,  कौन संन्देशा ले जाय मेरो - सैंयां . . . . .  7 - सुवा पण्डित पातीया लेखे हो पातिया  काग संन्देशा ले जाय मेरो - सैंया . . . . .  8 - काहे को कागज बनाऊ ,  काहे बनाऊ स्याही मेरो - सैंया . . . . .   9 - अनचल फाड़ी कागज बनाऊ ,  सुरमा पौंछी के स्याही मेरो - सैंया . . . . .  10 - जब मेरे पिया घर आयेगे ,  पिया को हृदय लगाय मेरो  सैंयां निरमोहिया कब आवे ।

होली नं0 - 54 (बलमा घर आये फागुन में)

होली नं0 - 54  1-बलमा घर आये फागुन में ,  सजना घर आये फागुन में ।  2-गाय को गोबर अगना लियो है ,  मोतियन चौक परावन में - सजना . . . .   3 - फुल गये टेसु निकसी गयो अम्बा ।  मोर जो नाचे वन - वन में - सजना . . . .  4- चैत ही मास में वन फले पाके ,  आम जो पाके सावन में - सजना . . . . .  5-सुन्दर तेल फूलेल लगाऊ ,  मंगल साज सजावन में - सजना . . . .  6-जब मेरे पिया घर आयेगे ,  लडू पेड़ा लावन में - सजना . . . .  7 - पिया सोवै सेज बिस्तर में ,  पूड़ी पकौड़ी खिलावन में  बलमा घर आये फागुन में ,  सजना घर आये फागुन में । 

होली नं0 - 53 (खिड़िकियो पर ठाडो देख राधे लौडा बजा गयो बासुरिया)

होली नं0 - 53   1 - खिड़िकियो पर ठाडो देख राधे  लौडा बजा गयो बासुरिया  2 - काहे की तेरी बासरिया हो बासरिया  काहे को मेरा बेन राधे - लौडा . . .  बजा गया बासुरिया - खिड़िकिया पर ठाड़ो  नोट - ऊपर की होली के बोल है । 

होली नं0 - 52 (ले चल ले चल रंग ले बालुम)

होली नं0 - 52 1- ले चल ले चल रंग ले बालुम .  तेरी बन्शी ने मेरो मन मोह लियो  2 - काहे की तेरी बांसुरिया हो बांसुरिया ,  हट काहे को तेरो बेन राधा - तेरी . . .  तेरी बन्शी ने मेरो मन मोह लियो 

होली नं0 - 51 (कान्हाँ की मुरली वृन्दावन में सखी)

होली नं0 - 51   1 - कान्हाँ की मुरली वृन्दावन में सखी  मधुर - मधुर स्वर बाज रही  2 - काहे की तेरी मुरलीया हो मुरलीया ,  काहे को तेरो बेन सखी - सुन . . . .  3 - बाँस की मेरी मुरलिया हो मुरलिया ,  सोने को मेरो बेन सखी - सुन . . . .  4 - कै मोल की तेरी मुरलिया हो मुरलिया ,  कै मोल को मेरो बिन सखी - सुन . . . .   5 - नौ लाख को मेरी मुरलिया हो मुरलिया ,  अनमोल को मेरो बीन सखी - सुन . . . .  6 - कै स्वर बाजे मुरलिया हो मुरलिया ,  कै स्वर बाजे बीन सखी - सुन . . . .  7 - छ स्वर बाजे मुरलिया हो मुरलिया ,  नौ स्वर बाजे बिन सखी - सुन . . . .  8 - कौन शहर की मुरलिया हो मुरलिया ,  कौन शहर को बिन सखी - सुन . . . . 9 - मथुरा शहर मुरलिया हो मुरलिया ,  किया गोकुल को यो बिन सखी - सुन  10 - कौन बजावै मुरलिया हो मुरलिया ,  कौन बजावे बिन सखी - सुन  11 - कृष्णा बजावै मुरलिया हो मुरलिया  राधा बजावै बिन सखी - सुन मधुर - मधुर स्वर बाज रही कान्हा की मुरलिया ।

होली नं0 - 50 (ओ तो जिनके बालुम काले नाग)

होली नं0 - 50 1 - ओ तो जिनके बालुम काले नाग  सजनी हाथ जोड़े खड़े नागनी  2 - कौन दिशा से बालक आयो  कौन दिशा को जाय - सजनी  3 - पूरब दिशा से बालक आयो ,  पश्चिम दिशा को जाय - सजनी  4-  काहे की कोख में जन्म लियो है .   कौन खिलावे गोद - सजनी 5- देवकी कोख में जन्म लियो है ,  यशोदा खिलावे गोद - सजनी . . . . . .  6-कौन शहर से बालक आयो ,  कौन शहर को जाय - सजनी . . . . . .  7-मथुरा शहर से बालक आयो ,  गोकुल को यो जाय - सजनी . . . . . .  8-काहे कराण बालक आयो ,  काहे कारण जाय - सजनी . . . . .  9-गऊ चुगावन बालक आयो ,  राश रचन को जाय - सजनी . .  सजनी हाथ जोडे खडे नागनी ।

होली नं0 - 49 (सलवा में झलक रही दो मैना)

होली नं0 - 49  1-सलवा में झलक रही दो मैना  सलवा में झलक रही दो मैना  2 - काहे ने पाले हरे परेवा ,  काहे ने पाले यो मैना - सलवा . . . . .  3-राजा ने पाले हरे परेवा .  रानी ने पाले यो मैना - सलवा . . . .  4-काह चुगत है हरे परेवा ,  काह चुगत है यो मैना - सलवा . . . . .  5-डाल चुगत है हरे परेवा ,  मोती चुगत है यो मैना - सलवा . . . . .  6 - कहाँ बसत है हरे परेवा ,  कहाँ बसत है यो मैना - सलवा . . . . .  7-जंगल बसत है हरे परेवा ,  शहर बसत है यो मैना - सलवा . . . . . 8 - काहे बरन के हरे परेवा ,  काहे बल की यो मैना - सलवा . . . . . .  9 - श्वेत वरन की हरे परेवा ,  लाल हरे की यो मैना सलवा मै झलक रही दो मैना । 

होली नं0 - 48 (वृन्दावन केसर क्यो ना बोयें क्यों ना बोये)

होली नं0 - 48  1 - वृन्दावन केसर क्यो ना बोयें क्यों ना बोये 2  क्यो ना बोये - वन्दावन . . . . .  2 - काहे में बोऊ कॅशरी लला केशरी ,  काहे में बोऊ गुलाब लला - वृन्दावन . . . . 3- क्यारी में बोऊ केशरी लला केशरी ,  झाड़ी - बोऊ - गुलाव लला - वृन्दावन . . . . .  4 - के हल बाऊ केशरी लला केशरी ,  के हल बोऊ गुलाब लला - वृन्दावन . . . . । 5- छ : हल बोऊ केशरी लला केशरी .  नो हल बाऊ गुलाब लला - वृन्दावन . . . . . .  6 - कै मन भई है केशरी लला केशरी ,  कै मन भई है गुलाब लला - वृन्दावन . . . .  7 - छ मन भई है केशरी लला केशरी ,  नौ मन भई है गुलाब लला - वृन्दावन . . . .  8 काहे छिडकू केशरी लला केशरी ,  काहे में छिडकू गुलाब लला - वृन्दावन . . . . 9 कृष्णा जी छिड़क केशरी लला केशरी ,   राधा में छिडकू गुलाब लला  वृन्दावन बन केशर क्या ना बोई ।

होली नं0 - 47 (सोने के रधुनाथ लला , सीता परमेश्वर वर पाये)

होली नं0 - 47   1-सोने के रधुनाथ लला ,  सीता परमेश्वर वर पाये  2-कौन रजा घर सीता भई है ,  कौन रजा घर राम लला - सीता . . . . .  3-जनक रजा घर सीता भई है ,  दशरथ के घर रात लला - सीता . . . . . .  4-कितने बरस की सीता भई है ।  कितने बरस के राम लला - सीता . . . . .  5 सात बरस को सीता भई है .  बारह बरस के राम लला - सीता . . . . .  6 - कौन वरन को सीता भई है ,  कौन बरन के राम लला - सीता . . . . .  7-गोर वरन को सीता भई है ,  श्याम वरन के राम लला - सीता . . . . .  8-पर परमेश्वर बर पाये -  सोने के रधुनाथ लला सीता परमेश्वर वर पाये । 

होली नं0 - 46 (श्री अर्जुन से कह श्याम सुन्दर मोरे ध्वज राजा सतधारी)

 होली नं0 - 46  1-श्री अर्जुन से कह श्याम सुन्दर  मोरे ध्वज राजा सतधारी  2-इक ब्राह्मण इक सिंग वनों है ,  जांचन आये वनवारी - मोरे ध्वज . . . . .  3-चरण धाये चरणो दक लीनो ,  आसन दीनो बैठारी - मोरे ध्वज . . . .  4-आवो ब्राह्मण भोजन पाओं ,  यह लो कंचन थाल सुन्दर - मोर ध्वज . . . .  5-ना हम तुमरो भोजन पावे ,  ना लेवे कंचन थाली - मोरे ध्वज . . . .  6- मेरो सिह तेरो सुत को झूको ,  यह लो कंचन की आरी - मोरे ध्वज . . . .  7- इक बट राजा चिरन लागे ,  इकबट बालक महवारी - मोरे ध्वज . . . . 8- राजा रानी चिरन लागे , प्रकट भये हैं वनवारि - मोरे ध्वज . . . .  ध्वजा राजा सत धारी  सतधारी सतधारी मोरध्वज राजा सतधारी । 

होली नं0 - 45 (उठ मिल हो भरत रधुवर आये)

होली नं0 - 45 1 - उठ मिल हो भरत रधुवर आये ,  उठ मिल हो भरत रधुवर आये  2 - सूरजा आये चन्दा आये ,  तारे जो आये गगन चड़के - उठ . . . .  3 - राम जी आये लछिमन आये ,  सीता जी आयी रथ चढ़ के - उठ . . . . .  4 - ब्रह्मा जी आये विश्नू जी आये ,  शंभू आये बहल चढ़के - उठ . . . . .  5-कहां - कहां भाई विपत गवाई ,  कौन पुरी में सुख पाई - उठ . . . . .   6 बन - बन में भाई विपत गवाई ,  अयोध्या पुरी में सुख पाई - उठ . . . .  उठ मिल हो भरत रधुवर आये ।

होली नं0 - 44 (शिव तेरे मन माही बसै काशी)

होली नं0 - 44 1 - शिव तेरे मन माही बसै काशी  शिम तेरे मन माही बसै काशी  2-आधा काशी में बामन बनियाँ ,  अधा काशी में सन्यासी - शिव . . . .  3 - काहे बरन को बामन बनियाँ  काहे वरन सन्यासी - शिव . . . .  4 - गोरे वरन को बामन बानियाँ ,  श्याम वरन सन्यासी - शिव . . . .  5 - काह करत है बामन बनियाँ ,  काह करत है सन्याशी - शिव . . . .  6 - पूजा करत है बामन बनियाँ , वेद पड़त हैं सन्यासी - शिव . . . .  7 - कौन रमा । अक्षत चन्दन ,  कौन रमावै सन्यासी - शिव . . . . .  8 - अक्षत रमावै बामन बनियाँ ,  विभूति रमावै सन्यासी - शिव . . . . . शिव तेरे मन माही बसै काशी । 

होली नं0 - 43 (नन्दन नन्द बृज लाल उधो)

होली नं0 - 43  1-नन्दन नन्द बृज लाल उधो  मथुरा से वृज में कव आवै  2-हिल मिल वृज में ख्याल रचौ है  ऐसो ख्याल रचो है - उधो . . . .  3-जब नन्द लाल वृज में पहुचे ,  दिन की हो गयी रात - उधो . . .  4-जो 2 चरिथ किये जब उनने ,  सत्य कहो महाराज - उधो . . . .  5-श्याम सुन्दर नटवर मन मोहन ,  नहीं भावै जलपान - उधो . . . .  6-इन्द्र रजा की पूजा करावै ,   गोवरधन की कराई - उधो . . . .  मथुरा से वृज में कब आवे ? 

होली नं0 - 42 (तुम लौटी चलो घर जाय भरत)

होली नं0 - 42  1-तुम लौटी चलो घर जाय भरत ,  मेरी प्रजा को दु : ख मत दीजो 2- दोस नही कूछ मातु का भाई ,  कर्म में लिख दी बात - भरत मेरी .... 3- चौदह वरस तपस्या करके ,  जल्दी आ लौटी - भरत मेरी . . . .  4- ले हो भैया खड़ाऊ ले जा ,  तम हो दीन दयाल - भरत मेरी .  5-धन्य विधाता यह क्या कीन्हा ,  जग में प्ररलय होय - भरत मेरी . . . .  6-जाओ भरत तुम सेवा करना ,  जनता को सुख देत - भरत मेरी . . . .  7-विप्र भरत जी घर को लौटे ,  दुनिया को सुख देत - भरत मेरी . . .  8- मेरी प्रजा को दुख मत दीजो - तुम लौटि चलो घर जाय भरत मेरी प्रजा को दु : ख मत दीजो 

होली नं0 - 41 (हाँ जी राधे यमुना अकेली मत जय्या)

होली नं0 - 41  1-हाँ जी राधे यमुना अकेली मत जय्या  वही रहें चित चोर राधे - यमुना अकेली ... 2-बन्शी वट से आन मिलो है ,  सुन्दर श्याम स्वरूप राधे - यमुना अकेली ... 3-पान खाई मुख मुरली बजाई ,  अनचल प्रेम लगाई राधे - यमुना अकेली ... 4-अंगूठी पकड़ मेरी बय्यां मरोरी ,  खीचत लम्बी चीर राधे - यमुना अकेली ... 5-अनचल लूटी कदम चड़ी बैठे ,  हंसी हंसी बात कराई राधे - यमुना अकेली ... 6-मांगे अनचल देवत नाही ,  गोपी रहे सरमाय राधे  यमुना अकेली मत जैयौ वही रहे चित चोर  ।।।श्री कृष्ण कन्हया लाल की जै ।।

होली नं0 - 40 (मत भूलो यशोदा नन्दन को)

होली नं0 - 40  1-मत भूलो यशोदा नन्दन को ,  तुम जपलो यशोदा नन्दन को । 2- पूरण ब्रह्मा सकल निवासी ,  भूमि को भार उतारन को - तुम जपलो . . . . .  3-काहे की कोख जन्म लियो है ,  काहे के कारण आवन को - तम जपलो . . . . .  4-देवकी कोख से जन्म लियो है ,  कंश को वंश मिटावन को - तुम जपलो . . .  5-प्रकट भये है श्याम मुरारी ,  संन्तन को दुःख देखन को - तुम । 6-मथुरा नगर में जन्म लियो है ,  गोकुल रास दिखावन को - तुम जपलो ..... 7-विश्व चराचर कृष्ण मुरारी ,  दुखियन को दुख तारन को - तुम जपलो ..... 8-नारद शारद व्यास मुनी जी ,  जिनकी खोज लगावन को - तुम जपलो ..... 9-जो नर होली ध्यान करत है ,  सीधे स्वर्ग सिधारन को  तुम जपलो यशोदा नन्दन को ।

होली नं0 - 39 (कुण्डल पुर के राजा भीस्मक)

होली नं0 - 39   1-कुण्डल पुर के राजा भीस्मक ,  कुण्डल पुर . . . . . . .  2 - ता घर उपजी कन्या ,  रूकमणी नाम कहाय - कुण्डल पर  3 - उसी शहर में अदबिच ,  देवी का मन्दिर होय - कुण्डल पर . .  4-नित उठ नहा के कन्या ,  देवी को पूजन जाय - कुण्डल पुर . . . .  5-पिता कहे में बेटी ,  ब्याहूगा शिशुपाल - कुण्डल पुर . . . . .  6-भाई कहे मै बहिना  ब्याहूगा कृष्ण कुमार - कुण्डल पुर . . . . .  7-नित उठ कन्या जेपै  कृष्ण कन्हया जाल - कुण्डल पुर . . . . . .  8-कृष्णा रूकमणी होवै ,  युग युग के अवतार  कुण्डल पुर के राजा भीष्मक नाम कहाय

होली नं0 - 38 (सारी मथुरा फूलों से छाय रही)

होली नं0 - 38 1 - सारी मथुरा फूलों से छाय रही  सारी मथुरा . . . . .  2 - पूरब झरोखे विष्णु जी बैठे ,  लक्ष्मी झूला झूल रही - सारी मथुरा . .  3 पश्चिम झरोखे में ब्रहमा जी बैठे , गौरा झूलन झूल रही - सारी मथुरा . . . . .  4-दक्षिण झरोखे में कृष्णा जी बैठे ,  राधा झूलन झूल रही - सारी मथुरा . . . . . . . . . .  5 उत्तर झरोखे में राम जी बैठे ,  सीता झूलन झूल रही - सारीमथुरा . . . . . . . . . .  सारी मथुरा फूलों से छाय रही 

होली नं0 - 37 ( लागी गयो है बाण रानी)

होली नं0 - 37  1- लागी गयो है बाण रानी  दशरथ मछली छेदन में  2-एक समय सुन रानी सयानी ,  मृगया की मन ठानी रानी - दशरथ मछली . . .  3- वन में जाय सरोवर देखा ,  बैठ किनारे जाय रानी - दशरथ मछली  4- ताही समय श्रवण वहां पहुचे ,   लेने निरमल नीर रानी - दशरथ मछली . . .  5 - घड़ा डुबाया ज्यों ही जल में ,  शब्द घड़े का होय रानी - दशरथ मछली . . .  6 - मृग आना जाना मन में ,  खीच के मारा बाण रानी - दशरथ मछली . . . 7 - श्रवणा कुंवर को बाण लगो है ,  हा - हा शब्द सुनाय रानी - दशरथ मछली . . .  8 - ताही समय श्रवण वहाँ पहुचें ,  पूछा सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . .  9 - मातु पिता का एक सहारा ,  लेने आया नीर रानी - दशरथ मछली . . .  10 - जा के कहियो मातु पिता से ,  श्रवण मरी यो जाय रानी - दशरथ मछली . . .  11 - पानी ले के दशरथ पहुचे ,  बोले सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . .  12 - पुत्र वियोग में हम मरते हैं , सो दुख व्यापै तोही रानी - दशरथ मछली . . .  13 - पुष्प विमान में तीनो बैठे ,  सी...

होली नं0 - 36 (हाँ जी उधो करमन की गति न्यारी है)

होली नं0 - 36  1- हाँ जी उधो करमन की गति न्यारी है ,  करमन करत पुकार ऊधो करमन की गति . . . ।  2 - हाँ जी ऊधो एक राजा के दो - दो कुवर थे ,  दो राजा दो योगी - ऊधो करमन . . .  3-हाँ जी ऊधो मुर्ख राजा ने राज कियो है ,  पण्डित भयो है भिखारी - ऊधो करमन . . . . . . .  4-हाँ जी ऊधो कहिये संन्देश श्याम सुन्दर से ,  तुम हो दीन दयाल - ऊधो करमन . . . . . . .  5-हाँ जी ऊधो गर्बन को तुम शेर वनो है ,  दुखियन को माई बाप - ऊधो करमन . . . . . . . 

होली नं0 - 35 (गिरीधर राज लियो कंसासुर को मथुरा)

होली नं0 - 35  1- अच्छ हाँरे गिरीधर राज लियो कंसासुर को  मथुरा पड़ गई भीड़ गिरीधर राज कियो कंसासुर को  2-हरी मथुरा में जन्म लियो , गोकुल दे पहुंचाय ,  गिरीधर खुले किवाड़े चौकड़ के सोवे  यशोदा लाल गिरीधर राज . . . . . . . . . .  3- घुगरू लगाये पैरन में , गैय्यन पिछै जाय गिरीधर  वन में जाय बिहार करे , सब ग्वालन के साथ ,  गिरीधर राज लियो कंसासुर  4- इधर उधर उतपात करे सब लड़कन के साथ गिरीधर बैठ पटक मटकिया फोड़ी , दही माखन को खाय - गिरीधर राज लियो . . . 5- एक कुवारी छूट पड़ी , पहुची यशोदा पास गिरीधर कुवर तुम्हारो दुष्ट बड़ो सब से करे विचपात  गिरीधर राज लियो . . . . . .  6-रस्सी ले के यशोदा गई आप खड़े भगवान गिरीधर रस्सी बांधी ऊदर में भयो दामोदर नाम गिरीधर राज लियो . . 7- कंश पठाय विदुश्य कियो वृन्दावन को जाय गिरीधर कुशल रहे तो कान्हा की रैन गये विशराय  गिरीधर राज लियो . . . . . . . . . . .  8-वृन्दावन में रास रचो , मारी बन्शी की तान गिरीधर राधा जी के कान पड़ी कागी बिरह की आग  गिरीधर राज लियो . . . . . . .  9 - सौ मन मद...

होली नं0 - 34 (धरती जो बनी है अमर कोई धरती जो बनी है अमर कोई)

होली नं0 - 34  1- धरती जो बनी है अमर कोई  धरती जो बनी है अमर कोई 2-नौ लख तारे गगन विराजै , सूरजा चले चन्दा दोई - धरती 3 - नौ लाख गंगा भू में विराजे ,  यमुना बहै गंगा दोई - धरती  4-नौ लख योद्धा जग में विराजै  राम भये लछिमन दोई - धरती  5-नौ लख देवी जग में विराजै ,  काली भई लक्ष्मी दोई - धरती  6-नौ लख तपस्वी जग में विराजै ,  ध्रुव भये श्रवणा दोई - धरती 

होली नं0 - 33 (कठिन शंकर चाप कैसे तौडत है , सुन्दर कोमल गात ये दोनो भाई है)

होली नं0 - 33  1-कठिन शंकर चाप कैसे तौडत है ,  सुन्दर कोमल गात ये दोनो भाई है  2-जनक राजा ने यज्ञ रचो है ,  सीता स्वयंवर होय कैसे - तोडत हैं ।  3 - देश ही देश के भू पति आये ,  शिव धनु तोड़न आये कैसे - तोड़त हैं  4 - तिल भर चाप उठे ना भू से ,  राजा सब सरमाय कैसे - तोड़त हैं  5 मुनिवर वेश में राम लछिमन ,  जनक राजा घर आये कैसे - तोड़त हैं ।  6-कर पकड़त शिव चाप उठाये ,  तोड़ धनुष को गिराय - कैसे  7-श्यामल गौर किशोर को देखा ,  सीता जी माला छ जाय कैसे - तोड़त हैं 8-सीता स्वयंवर राम से कीन्हा ,  घर में मंगल सजाय कैसे तोडत है । सुन्दर कोमल गात ये दो भाई है ।

होली नं0 - 32 (अचल मेरो छोड़ श्याम , तेरी । गऊ चली वृन्दावन को)

होली नं0 - 32 1 - अचल मेरो छोड़ श्याम ,  तेरी । गऊ चली वृन्दावन को   2 - ना हम लावै लौग सुपारी ,  ना पर भत की सौठ - श्याम 3- हम जो लाती दही की मटिया , दान काहे को होय श्याम - तेरी 4- दान दही को दान मही को ,  दान जो मन को होय श्याम - तेरी  5- तोड़ कन्हया वडू को पचा ,  दहिया देहू चखाय श्याम - तेरी  6 - दही तुम्हारो खट्टो मीठो  छाँस भई अमल्लाय - तेरी 7 - मारू मुटको तोडू मटकी ,  दही देऊ विखराय श्याम - तेरी  8- दही मैरो खायो मटकी फोडी , छास दीयो विखराय श्याम - तेरी  9-गऊ चली वृन्दावन को - अचल मेरी  छोड़ श्याम तेरी गऊ चली वृन्दावन को ।

होली नं0 - 31(राजा बली के छलकारी बामन वन आये वनबारी)

होली नं0 - 31 1-राजा बली के छलकारी  बामन वन आये वनबारी  2-कस्यप मुनी के पुत्र कहावै  अदिति गोद की अवतारी - बामन 3 - बगल में छाला हाथ में पोथी , सिर चुटिया लटके भारी - बामन  4-बाऊन अगुल गात हैं जिनका  खड़े चन्दन की छवी न्यारी - बामन  5-काधे धाती प्रभु जी चले है ,  बली राजा के निकट धारी - बामन  6-हसी 2 प्रभु जी बात करत है ,  वचन तो बोले छलकारी - बामन  7-तीन चरण भूमि दान जो दीजो  जिसमे मैं बनाऊ कुटी भारी - बामन 8- वली राजा मंजूर भये हैं ,  दान दिया है अति भारी - बामन  9 - एक चररा भूमि पृथ्वी को छापै ,  दूजो चौद भूवन सारी - बामन  10 - बली को रसावल राज दियो है ,  आप बने हैं दरवारी - बामन बन आये बनवारी

होली नं0 - 30 (शिव रचै गरुड़ तेरी असवारी)

होली नं0 - 30  1-शिव रचै गरुड़ तेरी असवारी - 2  2-पान सुपारी शिव नही भावै ,  भांग धतुरी में दिल राजी - शिव 3-हस्ती घोडा शिव नहीं भावै ,  बुढ़े वहल पर दिल राजी - शिव  4 - रंग महल में शिव नहीं भावै ,  घाट शिमसानी दिल राजी - शिव  5 - मल - मल खस्सा शिव नहीं भावै ,  छाल बगम्बर मन राजी - शिव  6-अक्षत चंदन शिव नहीं भावै ,  राख वभूति में दिल राजी - शिव  रचै गरूड़ तेरी असवारी

होली नं0 - 29 (जल मथै मछन्दर नाथ कन्हय्या , देव दानव सब मिल कर के)

होली नं0 - 29  1 - जल मथै मछन्दर नाथ कन्हय्या ,  देव दानव सब मिल कर के  2 - काहे कारण जल को मथो है ,  कौन सी चीज निकाल - कन्हय्या 3 -  अमृत के कारण जल को मथो है ,  चौद ही रत्न निकाल - कन्हय्या 4 - काहे की तो मथनी बनी है ,  काहे बनावै माथ - कन्हय्या  5 -  बासु नाग की मथनी बनी है ,  मन्द्राचल को माथ - कन्हय्या  6 -  पहले मथन में विष की ज्वाला ,  शंकर दीयो पिलाय - कन्हय्या   7 -  दूसरे मथन में कौतुक मणी है ,  लस मीन चतुरभुजी को सुहाय - कन्हय्या  8 -  चौ दन्त हाथी जल से निकले, इन्द्राशन पहुचाय - कन्हय्या  9 -  स्वेत वरन असु जल से निकला ,  ममा कि बलि राजा को दिलाय - कन्हय्या  10 -  लक्ष्मी माता जल से निकली ,  विष्णु के बाम सुहाय - कन्हय्या  11 -  वैद्य धनवन्तरी जल से निकले ,  अमृत कलश ले हाथ - कन्हय्या  12 -  अमृत कलश ले दैत्य जो भागे , देव भये है निराश -  कन्हय्या 13 - तब प्रभु मोहिनी रूप धरो है ,  गये हैं दैत्यों के पास - कन्हय्या  ...

होली नं0 - 28 (कहत मन्दोदरी नारी पिया तुम)

होली नं0 - 28   1- कहत मन्दोदरी नारी पिया तुम  दे दो सिया सुन्दर नारी  2- तीनों लोक के हर्ता कर्ता ,  जिनकी नारी लाये पिया - तुम दे दो . . . . . .  3- राम पिता हैं जगत गुसांई ,  सीता जगत की माय पिया - तुम दे दो . . . . .  4- जिनका एक ही दूत जो आवै ,  सोने की लंका जलाय पिया - तुम दे दो . . . . .  5- अक्षय कुंवर को हाथ से खोया ,  करनी का फल पाय पिया - तुम दे दो . . . . .  6- जा सागर का गर्भ करत हैं ,  ता में पुल बधवाय पिया - तम दे दो . . . . . .  7- भक्त बिभीषण भाई तुम्हारा ,  उनके दल में जाय पिया - तुम दे दो . . . . .  8- हाट ही वाट को अंगद रोके ,    लौ घट रोके राम पिया - तुम दे दो . . . . . 9 - खुले किवाड़े लछिमन बैठे ,  कूद पड़े हनुमान पिया - तुम दे दो . . . . . 10 - हंसी - हंसी रावण बोलन लागे ,  नारिन को बहकाय पिया - तुम दे दो . . . . .  11 - मेघनाथ ही जो पुत्र हमारे ,  कुम्भ करण बल भाई पिया - तुम दे दो . . . . . 12 - भूप ही देश से पकड़ मगाऊँ  वह तपस्वी दोनों भाई पिया - त...

होली नं0 - 27 (हो मोहन नन्द लाल वर्षा न वन आये)

होली नं0 - 27   1-हो मोहन नन्द लाल वर्षा न वन आये ,  2- वर्षाने की ग्वाल गुजरिया कहाँ दही वेचन जाय ,  बीच मिले नन्द लाल अनचल  दे पकड़ाय वर्षा ने वन आये - हो  3- बैठे कदम की छाया ग्वाला दे हो बुलाय ,  दूना दय्या दे चखवाय - वर्षा ने  4- काहे को तेरो चीरा है रे काहे लख है जडाय ,  काहे के माथे विराजे यो यशोदा को लाल 5- सोने को मेरो चीरा है रे ,  हीरा करव जड़ाय , कृष्णा के माथे विरजे यो यशोदा का लाल - वर्षा ने  6-गरजी - गरजी गोवर धन बरसे , बरसत मूशला धार , गोवर धन नख पर धारे , मेरे प्रण अधार -वर्षा ने बन आये -  हो मोहन नन्द लाल वर्षा ने वस आये । 

होली नं0 - 26 (हरी धरै मकुट खेलै होली , सिर धरै मकुट खेलें होली)

होली नं0 - 26   1-हरी धरै मकुट खेलै होली ,  सिर धरै मकुट खेलें होली  2-कितने वरस के कुंवर कन्हय्या ,  कितने वरस राधा गोरी - हरि  3-बार वरस के कुंवर कन्हय्या ,  सात बरस राधा गोरी - हरि  4- काहे वरन के कुंवर कन्हय्या ,  काहे वरन राधा गोरी - हरि  5-श्याम वरन के कुंवर कन्हय्या ,  गौर वरन राधा गोरी - हरि  6-काह विराजे कवर कन्हय्या ,  काह विराज राधा गोरी - हरि 7- मकुट विराजै कुंवर कन्हय्या ,  हार विराजै राधा गोरी -  हरि धरे मकुट खेलें होली सिर धरै मकुट खेलें होली .  । । श्री कृष्ण कन्हय्या लाल की जै । । 

होली नं0 - 25 (ओ लिखी टलती नाही जो विधी लेखै ब्रह्मा जी)

होली नं0 - 25 1- ओ लिखी टलती नाही  जो विधी लेखै ब्रह्मा जी  2- भगीरथ कुल में दशरथ हुए हैं ,  दशरथ घर में राम - धन्य करम तेरी 3 - एक धीवर ने मछली मारी ,  ले गयो राजा के पास - धन्य करम तेरी काम तेरी लीला  4 - दशरथ राजा मास कटत हैं .  अंगूठा लागे फॉस - धन्य करम  5 - दशरथ राजा तीनों हैं रानियाँ .  पहरा दे दिन रात - धन्य करम  6 - पहलो पहरा रानी कौशल्या ,  राजा चैन न होय - धन्य करम  7 - दूसरो पहरा रानी सुमित्रा ,  राजा नींद न होय - धन्य करम  8 - तीसरों पहरा रानी केकई को ,  सोवे पाव पसारी - धन्य करम  9 - चौथो पहरा राजा दशरथ को .  अंगूठा लेवे सोश - धन्य करम  10 - मागिले रनियाँ जो वर माँगे ,   जो मन इच्छा होय - धन्य करम  11 - जो मैं मागू ना दे हो राजा ,   बचन अकारत जाय - धन्य करम ।  12 - जो तू माँगे दे दू हो रानी ,  राम सपथ सब खाय - धन्य करम  13 - राम लछिमन वन वास दीजो . .  भरत ही दीजो राज - धन्य करम  14 - राम लछिमन वन को गये हैं ,  सीता लागे साथ - धन्य करम...

होली नं0 - 24 (गई - गई असुर तेरी नारी मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में)

होली नं0 - 24   1- गई - गई असुर तेरी नारी  मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में  2 - थलिया भर - भर लडू - पेड़ा ,  गडूवा भर - भर नीर - मन्दोदरी  3- ले हो सीता भोजन कर ले ,  हम लंका की नारी मन्दोदरी - सिया  4-ना मैं तुम्हरो भोजन पाऊँ ,  ना मैं पीऊ नीर - मन्दोदरी  5- जो मैं हूंगी सत्य की सीता ,  होवे असुर कुल नाश - मन्दोदरी  6-सुन हो देवी सीता माता ,  काहे को होत उदास - मन्दोदरी  7- सुन हो मन्दोदरी रावण रानी  वंश रावण को विनाश - मन्दोदरी   8-राम गुसाई जग के ईश्वर ,  उनकी हूं मैं नारी - मन्दोदरी  सिया मिलन गई बागा में । 

होली नं0 - 23 (अच्छ हाँ रे सीता वन में , अकेली कैसे रही)

होली नं0 - 23 1- अच्छ हाँ रे सीता वन में ,  अकेली कैसे रही  2- कैसे रही दिन रात सीता वन में ,  अकेली कैसे रही  3-अच्छ हॉ रे सीता रंग महल को छोड़ चली ,  वन में कुटिया रमाय - सीता  4-अच्छ हॉ रे सीता सौड़ सुवेद को छोड़ चली ,  वन में पतिया विछाय - सीता  5-अच्छ हाँ रे सीता सट रस भोजन छोड़ चली ,  वन में वन फल खाय - सीता 6- अच्छ हाँ रे सीता हस्ति घोड़ा छोड़ चली ,  वन में सिंह डराय - सीता 7 - अच्छ हाँ रे सीता साज सहेली छोड़ चली ,  वन में दूत डराय - सीता  8-अच्छ हॉ रे सीता तेल फूलेल छोड़ चली ,  वन में जटायें रमाय - सीता  वन में अकेली कैसे रही  कैसे रही दिन - रात - सीता  वन में अकेली कैसे रही ।

होली नं0 - 22 (वातिया जोति वदन पै सुहद सिया, सुन्दर चाँद सूरज लाये)

होली नं0 - 22   1-वातिया जोति वदन पै सुहद सिया,  सुन्दर चाँद सूरज लाये  2-धन - धन सीता भाग्य तुम्हारो ,  राम जी जैसे वर पाये सिया - सुन्दर  3-धन - धन सीता भाग्य तुम्हारो ,  लछिमन जैसे देवर पाये - सिया  4- धन - धन सीता भाग्य तुम्हारो ,  दशरथ जैसे ससुर पाये - सिया 5-धन - धन सीता भाग्य तुम्हारो ,  कौशल्या जैसी सासु पाये - सिया  6- धन - धन सीता भाग्य तुम्हारो ,  अयोध्या जैसो शहर पाये - सिया  सुन्दर चाँद सूरज लाये - वाजिया जोति  वदन पै सुहद सिया - सुन्दर चाँद सूरज लाये । 

होली नं0 - 21 (दही मथै यशोदा माई कदम तलक । झूलो कन्हय्या पालना )

होली नं0 - 21 1- दही मथै यशोदा माई कदम तलक ।  झूलो कन्हय्या पालना  2 - काहे को तेरो पालङा हो पालङा ,  काहे को तेरो डोर कदम तल - झूलो 3-सोने को मेरा पालङा हो पालङा ,   रेशम को यो डोर , कदम तल - झूलो  4 - कौन शहर को पालङा हो पालङा ,  कौन शहर को डोर कदम तल - झूलो  5- मथरा शहर को पालङा हो पालङा ,  गोकुल को यो डोर कदम तल - झूलो  6 - कौन झुलावै पालङा हो पालङा ,  कोन झुलावै डोर कदम तल - झुलो  7 - यशोदा झुलावै पालङा हो पालङा ,  झूला झुलाव डोर कदम तल - झूलो  8-कौन जी सोवै पालङा हो पालङा ,  कौन हिलावै डोर कदम तल - झूलो  9-कृष्णा जी सोवै पालङा हो पालङा ,   नन्द हिलावै डोर कदम तल - झलो ।

होली नं0 - 20 (सिर चन्दन की कोर झलक रहीहीरा चमक रही मस्तक में)

होली नं0 - 20 1 - सिर चन्दन की कोर झलक रही हीरा चमक रही मस्तक में  2-जल में कमल कमल में ब्रह्मा ,  चारों भुज दिगपाल झलक रही - हीरा 3 - सिर में मुकुट कानों में कुण्डल ,   गल बैजन्ती माल झलक रही . हीरा  4 - यमुना के तट पर धेनु चुगावै ,  हाथ में मुरली बास झलक रही - हीरा  5 - हाथ में मुरली कमर में लकुटिया ,  सिर घुगूराले बाल झलक रही - हीरा  6 - शाम सबेरे धेनु दुहावे ,  दही माखन के थाल झलक रही  हीरा चमक रही मस्तक में । 

होली नं0 - 19 (रचो - रचो हिमाचल राज गौरा के व्याहन को शिवजी चले)

होली नं0 - 19  1 - रचो - रचो हिमाचल राज गौरा  के व्याहन को शिवजी चले   2 - कौन बनावै मन्डपा हो मन्डपा ,  कौन रचावै व्याह - गौरा के  3 - ब्राह्मण बनावै मन्डपा हो मन्डपा  शिवजी रचावै व्याह - गौरा के  4 - कौन दिनन को मन्डपा हो मन्डपा कौन दिनन को व्याह - गौरा के  5 - इकादशी को मन्डपा हो मन्डपा  द्वादशी को ब्याह - गौरा के  6 - काहे को यह मंन्डप बनो है .  काहे सुतर पिराय - गौरा के  7 - अगर चन्दन को मण्डप बनो है .   रेशम सुतर फिराय - गौरा के....

होली नं0 - 18 ( तुम सुन लीजो अवतार चतुर भुज सुन लीजो)

होली नं0 - 18 1- तुम सुन लीजो अवतार  चतुर भुज सुन लीजो  2- सत युग में नर सिंह भये हैं ,  हिरणाकुश को मार - चतुर 3 - त्रेता युग में राम भये है ,  रावण कुल को नाश - चतुर भुज  4 - द्वापर युग में कृष्ण भये हैं ,  कंस को दीनों मार - चतुर भुज 

होली नं0 - 17 (श्री राम रटत प्रहलाद भगत , हिरण कुश वर कियो हरि से)

होली नं0 - 17 1-श्री राम रटत प्रहलाद भगत ,  हिरण कुश वर कियो हरि से  2-जब प्रहलाद स्कूल भेजे ,  राम ही राम सिखाय - भगत  3-जब प्रहलाद पर्वत पर डाले ,  फूलन सेज विछाय - भगत  4- जब प्रहलाद अग्नि पर डाले ,  बिन बादल बरसात - भगत  5- जब प्रहलाद सुई पर डाले ,  काख ही काख को जाय - भगत 6- तेल कढ़ाई गरम बनाई ,  ता पर भगत गिराय - भगत  7-जब प्रहलाद खम्बे पर बांधे ,  नरसिंह रूप दिखाय - भगत  8-हिरण कुश बैर कियो हरि से  श्री राम रटत प्रहलाद - भगत  हिरणाकुश बैर कियो हरि से  । । श्री कृष्ण कन्हय्या लाल की जै । । 

होली नं0 - 16 (अच्छ हॉ रे श्यामा महिमा तुम्हारी वरणी न जाय)

होली नं0 - 16 1-अच्छ हॉ रे श्यामा महिमा तुम्हारी वरणी न जाय चकित भये कपी लोग श्याम महिमा तुम्हरी 2- अच्छ हॉ रे श्यामा सृष्टी के रचता विष्णु भये ,  नाभी में कमल सुहाय श्यामा महिमा . . . 3- अच्छ हाँ रे श्यामा कमल से ब्रह्मा पैदा भये ,  चारों युग रचाय श्यामा महिमा . . .  4-अच्छ हाँ रे श्यामा उत्तर दिशा बद्रीनाथ भये ,  वौद्ध भये अवतार श्यामा महिमा . . .  5-अच्छ हाँ रे श्यामा सत युग में नरसिंह भये ,  हिरणा कुश को मार श्यामा महिमा . .  6-अच्छ हॉ रे श्यामा त्रेता यग में राम भये ,  रावण कुल को नाश श्यामा श्यामा महिमा.. 7- अच्छ हाँ रे श्यामा द्वापर युग में कृष्णा भये ,  कंस को दीनों मार श्यामा श्यामा महिमा..

होली नं0 - 15 ( शीष दियो मगवाय सुलोचन , सती चली वालम संग में)

होली नं0 - 15 1 - शीष दियो मगवाय सुलोचन ,  सती चली वालम संग में  2 - कटी भुजा देखी सुलोचन रोई  यह भुज किसकी होय सुलोचन - सती चली . .  3 - मेरे पति को वह नर मारे ,  जनम जती जो होय सुलोचन - सती चली 4 - जो तु भूज है मेरे पति का ,  लिख दे सारा हाल सुलोचन - सती चली  5 - कटी भुजा जब लेखन लागी .  लिख दी सारी लड़ाई सुलोचन - सती चली 6 - मुझको तो लछिमन ने मारा ,  वह योद्धा वर धाई सुलोचन - सती चली  7- मेरे पती का शीष दिला दो ,  पती संग सती मैं होऊ सुलोचन - सती चली   8-शीषों के ढेर सुलोचन पहुंची ,  शीष कटे हंसी जाय सुलोचन - सती चली . . . 9- पति के संग में सुलोचन चली है ,  सीधे स्वर्ग को जाय सुलोचन - सती चली . .  | | श्री कृष्ण कन्हया लाल की जै । । 

होली नं0 - 14 ( मुनि तुम संग बालक काहे के मुनि ये दो बालक काहे के )

होली नं0 - 14  1 - मुनि तुम संग बालक काहे के  मुनि ये दो बालक काहे के  2 - कौन नगर में जनम लियो है ,   का है नाम पिता इनके - मुनि तुम  3 - अयोध्या नगर में जनम लियो है ,  गोपाल दशरथ नाम पिता इनके - मुनि तुम  4 - काहे की कोख में जनम लियो है ,  का है नाम मुनि इनके - मुनि तुम ।  5 कौशल्या , सुमित्रा माता इनकी ,  राम , लछिमन नाम धरे - मुनि तुम  6 - घर छोड़ा वन गमन कियो है ,  कारण यह क्या होय लला - मुनि तुम  7 - अपने कारण जनकपुरी में ,   योग्य धनुष को देखन को - मुनि तुम  8 - श्यामल गौर किशोर को देखा ,   हर्ष भये हैं नगर वासी - मुनि तुम  9 - करपकड़त शिव चाप उठावै ,  तोड़ धनुष की बाल चली - मुनि तुम  10 - स्वयम्बर माला राम पैरें ,   सीता संग में उनके चली - मुनि तुम

होली नं0 - 13 (कुरू क्षेत्र होत लड़ाई , ऐ मुरलिया दल में कौरव दल में )

होली नं0 - 13 1 - कुरू क्षेत्र होत लड़ाई ,  ऐ मुरलिया दल में कौरव दल में  2 - कौरव पाँण्डव जुवरा खेलें ,  सत युग को अवतार - ऐ मुरलिया  3 - दो दल जुवरा खेलन लागे ,  दो दल पड़ गई रार - ऐमुरलिया  4-अरब - खरब सब धन को हारे ,  हारे कुन्ती को हार - ऐ मुरलिया  5-हस्तिनापुर की थात को हारे ,  हारे द्रोपती नारी ऐ मुरलिया  6-द्रोपती जब दुष्टों ने घेरी ,  भये हैं कृष्ण सहाय - ऐ मुरलिया  7 - राखी लाज करी ना देरी ,  कैसी लज बचाय - ऐ मुरलिया  8- दुशासन को गर्भ घटावै ,  त द्रोपती चीर बढ़ाय - ऐ मुरलिया  9 - लाख लीसा को घर बनवायो ,  वा में आग लगाय - ऐ मुरलिया  10 - भीम भये हैं रसोया ,  नकुल जलाये चिराग - ऐ मुरलिया  11 - युधिष्ठिर भये हैंजोगी ,  घर - घर भिक्षा लाय - ऐ मुरलिया  12 - पहरेदार सहदेव भये हैं ,  अर्जुन गय्या ग्वाल - ए मुरलिया  13 - लड़त - लड़त कौरव दल हारे ,  पाँण्डव राज चलाय - ऐ मुरलिया  श्री कृष्ण कन्हय्या लाल की जै

होली नं0 - 12 (विपत पड़ी महराज पाण्डू के सुत पाँचो भय्या)

होली नं0 - 12 1 - विपत पड़ी महराज पाण्डू के  सुत पाँचो भय्या  2 - कौरव पाण्डव जुवरा खेलें ,  सत युग को अवतार - पाण्डू - के - सुत   3- दो दल जुवरा खेलन लागे ,  दो दल पड़ गई रार - पाण्डू - के - सुत  4- अरब - खरब सब धन को हारे ,  हारे कुन्ती को हार - पाण्डू - के - सुत  5-हस्तिनापुर की थात को हारे ,  हारे द्रोपती नारी पाण्डू - के - सुत  6- द्रोपती जब दुष्टों ने घेरी ,  भये हैं कृष्ण सहाय - पाण्डू - के - सुत  7 - राखी लाज करी ना देरी ,  कैसी लाज बचाय - पाण्डू - के - सुत  8 - दुशासन को गर्व घटावै ,  द्रोपती चीर बढ़ाय - पाण्डू - के - सुत  9 - लाख लीसा को घर बनवायो ,  वा में आग लगाय - पाण्डु - के - सुत  10 - भीम भये हैं रसोया ,  नकुल जलाये चिराग - पाण्डु - के - सूत  11 - युधिष्ठिर भये हैं जोगी ,  घर - घर भिक्षा लाय - पाण्डू - के - सुत  12 - पहरेदार सहदेव भये हैं ,  अर्जुन गय्या ग्वाल - पाण्डु - के - सुत  13 - लड़त - लड़त कौरव दल हारे ,  पाँण्डव राज चलाय - पाण्डू - के - सु...

होली नं0 - 11 (दही लूटे नन्द को लाल , बेचन ना जय्यो)

होली नं0 - 11 1 - दही लूटे नन्द को लाल ,  बेचन ना जय्यो  2 - कुन्ज गलिन में ठाड़ो रहत है ,  पूछत हमसे सवाल दहिया को - बेचन  3-कहां के तुम ग्वाल गुजरिया ,  कहां दही बेचन जाय दहिया को - बेचन  4-मथुरा के हम ग्वाल गुजरिया ,  गोकुल बेचन जाय दहिया को - बेचन  5-तुमरो दहिया में डान लगत है ,  दान दियो घर जाय दहिया को - बेचन  6- कौन राजा की ग्वाल गुजरिया ,  कब से दहिया विकाय दहिया को - बेचन  7- कंस राजा की ग्वाल गुजरिया ,  वालापन से विकाय दहिया को - बेचन  8-कंस को मारू कंसासुर मारू ,  दीनों यमुना बहाय दहिया को - बेचन  9 - कंस राजा से जाय कहेंगी ,  तुमको दें मरवाय दहिया को - बेचन  10 - ना तुम यहां के राजा कहावै ,  ना तुम हो घटवाय दहिया को - बेचन  11 - नन्द महर के वाल कहावै ,  तुम कौ दान लगाय दहिया को - बेचन  12- हम ही यहां के राजा कहावै ,  हम ही हैं घटवाय दहिया को - बेचन । 13 - दान दही को दान जोथन को ,  दान दियो घर जाय दहिया को - बेचन  14- दूध - दही सब लूट लियो है ,  मट...

होली नं0 - 10 (इक हड़िया दो पेट हरजी)

होली नं0 - 10  1 - इक हड़िया दो पेट हरजी ,  चतुरही नारी श्रवण की ।  2 - इक दिन नारी मैत चली है ,  दो पेट हड़िया लाय हरजी - चतुरही  3 - इक में पाकै खट्टी मट्टरिया ,  इक में पाकै खीर हरजी - चतुरही  4 - सासु ससुर को खट्टी मट्टरिया ,  आफौं खावै खीर हरजी - चतुरही  5 - अन्धे अन्धौं ने बेटे से बोला ,  धन हमरी तकदीर हरजी - चतुरही  6 - बेटा तेरी सौ - सौ गैय्या ,  कभी ना खाई खीर हरजी - चतुरही  7 माता - पिता की बातें सुनकर ,  लगी विरह में पीर हरजी - चतुरही  8 - माता - पिता को खीर खिलाई ,  हम तब पिलवाया नीर हरजी - चतुरही  9 - श्रवण कुंवर ने नारी को त्यागा ,  आप बने तपधीर हरजी - चतुरही |

होली नं0 - 9 (तुम लीजो मह राज कन्हया)

होली नं0 - 9  1- तुम लीजो मह राज कन्हया  इन मोतियन को तुम लीजो ,  2- इन मोतियन से क्या - क्या बनत है ,  इन मोतियन से ब्रह्मा भये - राधे इन . . .  3-इन मोतियन से क्या - क्या बनत है ,  इन मोतियन से विष्णु भये - राधे इन . . .  4- इन मोतियन से क्या - क्या बनत है ,  इन मोतियन से शिव जी भये - राधे इन . . .  5 - इन मोतियन से क्या - क्या बनत है ,  इन मोतियन से कृष्ण भये - राधे इन . . .  6 - इन मोतियन से क्या - क्या बनत है ,  इन मोतियन से राम भये - राधे इन . . . 

होली नं0 - 8 (तुम तो भये तपवान कुंवर माथे पर गंगा जल धारे)

 होली नं0 - 8 1  तुम तो भये तपवान कुंवर माथे पर गंगा जल धारे - 2  2 - भगीरथ राजा ने तपस्या कीन्ही ,  नित गंगा के काज कुंवर - माथे 3- बारह वरस तक तपस्या कीन्ही ,  तब ब्रह्मा जी आये कुंवर - माथे  4-ब्रह्मा जी आके राजा से बोले ,  क्या मन इच्छा होय कुंवर - माथे   5- ब्रह्मा जी आगे राजा खड़े हैं , बोले सिर को झुकाय कुंवर - माथे  6 - बार वरस तक तपस्या कीन्हीं , नित गंगा के काज कुंवर - माथे ।  7 - बेगवती गंगा धरती में आवें,  धरती में कौन समाय कुंवर - माथे  8 - तब राजा कैलाश गये हैं ,  शिव को ध्यान लगाय कुंवर - माथे  9 - एक बरस तक ध्यान लगाया ,  तब शिव दर्शन पाये कुंवर - माथे  10 - जा राजा गंगा को ले आ ,  इच्छा पूरण होय कुंवर - माथे  11 - हरि चरणों से गंगा निकली ,  शिव की जटा में समाय कंवर - माथे  12 - राजा सगर के पुत्र जो तारे ,  तारे साठ हजार कंवर - माथे  13 - आप तरे वा जग को तारे ,  तारे सब संसार कुंवर - माथे  14 - गंगोतरी हो के गंगा निकशी .  पहुंच गयी हरिद्वार कुंवर -...

होली नं0 - 7 (हमें उतारो पार मल्हा)

होली नं0 - 7  1- हमें उतारो पार मल्हा,  हमसे उतराई ले ली जो -  2 कौन राजा के कुंवर कन्हया  किधर चले तुम जाय लला - हमसे  3- दशरथ राजा के कुंवर कन्हया  विपदा भोगन जाय मल्हा - हमसे  4- घर छोड़ा वन गमन कियो है ,  कारण यह क्या होय लला - हमसे  5- चौदह बरस वन में जायें ,  पिता दियो बनवास मल्हा - हमसे  6- माता कैकई ने पाप रचो है ,  मन्थरा भई है सहाय मल्हा - हमसे  7- ये दो तुमरे काह लगत है ,  क्या है तुम्हरो नाम लला - हमसे  8- नारी सौता लछिमन भाई ,  नाम मेरो है राम मल्हा - हमसे 9- क्या तुमसे उतराई ले लं ,  तुम हो दीन दयाल लला - हमसे 

होली नं0 - 6 (भजले सीता राम भया कोई)

होली नं0 - 6  1- भजले सीता राम भया कोई  हीरा जनम नहीं पाओगे  2 - इस कलयुग में दो ही बड़े हैं ,  इक गंगा इक गाय भया कोई - हीरा  3 - काहे कारण को गंगा बड़ी है ,  काहे कारण को गाय भया कोई - हीरा  4- पाप कटन को गंगा बड़ी है .  दान करन को गाय भया कोई - हीरा  5- इस कल युग में दो ही बड़े हैं ,  इक माता इक पिता भया कोई - हीरा  6- काहे कारण को माता भई है ,  काहे कारण को पिता भया कोई - हीरा 7- जनम देने को माता भई है .  पालन को इक पिता भया कोई - हीरा 

होली नं0 - 3 (भलो भलो जनम लियो)

होली नं0 - 3  1- भलो - 2 जनम लियो श्याम राधे .  भलो जनम लियो मथुरा में  2- भर भादों की अर्ध रात्रिया में ,  कृष्ण लियो अवतार राधे - भलो जनम  3 काहे की कोख में जनम लियो है ,  कौन खिलावै गोद राधे - भलो जनम 4- देवकी कोख में जनम लियो है ,  यशोदा खिलावै गोद राधे - भलो जनम . . 5 - चारों चौकी कंश राजा की ,  लग गये बजर किवाड़ राधे - भलो जनम . . .  6- चारों चौकी सोय गई हैं ,  खुल गये वजर किवाड़ राधे - भलो जनम . . .  7 - ले बालक वसुदेव गये हैं ,  पहुंचे यमुना तीर राधे - भलो जनम . . .  8 - जल ही की यमुना तल ही रही है ,  बिच - 2 बलुवा रेत राधे - भलो जनम . . .  9 - आगे - आगे वसुदेव चले हैं ,  पीछे सिंग डराय राधे - भलो जनम . . .  10 - ले बालक गोकुल में पहुंचे ,  हो गई जै - जै कार राधे भलो जनम . . . 

होली नं0 - 2 (इक ओरा हरी खेलें होरी )

होली नं0 - 2  1 - इक ओरा हरी खेलें होरी  इक ओरा नन्द लाला वे  2 - कौन जी पैरें अक्षत चंदन ,   कौन वभूति को टल्ला वे  3 - कृष्णा जी पैरें अक्षत चंदन,  सम्भू वभूति को टल्ला वे -  4 - कौन जी सोवै रंग महल में ,  कौन सिमसानी भस्स वे  5- कृष्णा जी सोवै रंग महल में ,  शम्भू सिमासानी भस्स वे  6 - कौन जी पैरें मलमल खस्सा ,  कौन बागम्बर छाला वे  7 - कृष्णा जी पैरें मलमल खस्सा . .  शम्भू बागम्बर छाला वे  8 कौन जी खावै पान सुपारी ,  कौन धतूरी को गल्ला वे  9 - कृष्णा जी खावें पान सुपारी ,  शम्भू धतूरी को गल्ला वे ।

होली नंबर 1 (सुमिरो सीता राम)

  श्री विष्णूपति होली सुमिरो सीता राम रंम भज रंम भज राधे । 2 - इक पेड़ जो जनमें मथुरा जी में, जड़ जागे जगनाथ । फूल फूले द्वारिका जी में , फल पाके बद्रीनाथ राम भज . . . . . . 3 - काहे की गड लंका है रे काहे को कैलाश काहे की यो अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम - 4 - सोने की गड़ लंका है रे , पत्थर को कैलाश पानन की अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम 5 - कौन दिशा गड लंका है रे , कौन दिशा कैलाश कौन दिशा अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम 6 - दक्षिण दिशा गड़ लंका है रे उत्तर दिशा कैलाश पूरब दिशा अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम 7 - कौन बसे गड़ लंका है , रे कौन बसे कैलाश कौन बसे अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम  8 - रावण बसे गड़ लंका है रे शिवजी बसे कैलाश दशरथ की अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम 9 - सोने चाँदी को रथ बनवायो जा में बैठे राम लछिमन , भरत , शत्रुघ्न - माता कौशल्या - पिता दशरथ संग में जानकी होय - राम भज . .