होली नं0 - 15 1 - शीष दियो मगवाय सुलोचन , सती चली वालम संग में 2 - कटी भुजा देखी सुलोचन रोई यह भुज किसकी होय सुलोचन - सती चली . . 3 - मेरे पति को वह नर मारे , जनम जती जो होय सुलोचन - सती चली 4 - जो तु भूज है मेरे पति का , लिख दे सारा हाल सुलोचन - सती चली 5 - कटी भुजा जब लेखन लागी . लिख दी सारी लड़ाई सुलोचन - सती चली 6 - मुझको तो लछिमन ने मारा , वह योद्धा वर धाई सुलोचन - सती चली 7- मेरे पती का शीष दिला दो , पती संग सती मैं होऊ सुलोचन - सती चली 8-शीषों के ढेर सुलोचन पहुंची , शीष कटे हंसी जाय सुलोचन - सती चली . . . 9- पति के संग में सुलोचन चली है , सीधे स्वर्ग को जाय सुलोचन - सती चली . . | | श्री कृष्ण कन्हया लाल की जै । ।