होली नं0 - 60 1-बैसाखै मास अब ऋति आगे गर्मी की - 2 2 - 2- वनज से आये तीन जने हैं तीनों घोड़े तीन सवार , आगे के तो जेठ हमारे पीछे देवरिया यार , बीच में बलम हमार जा में हरियल बाग हरियल बाग की यो बिजना बिजना की बहार - अब ऋतु आगे गर्मी की 3 - कहाँ बसत है जेठ तुम्हारे कहाँ देवरिया यार कहां बसंत है । बलमा तुम्हारे जा में हरियल बाग । हरियल बाग की यो विजना बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . 4 - जेठ बसत है ऊँची अटरिया देवरा चन्दन चौपाल बलमा बसै मेरो चौ बंगेला जा में हरियल बाग हरिया कलेकी यो बिजना बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . . . . . . 5 - काहे की तेरी ऊची अटरिया काहे को चौपाल काहे को तेरो चौ बगला जा में हरियल बाग हरियल बाग की यो बिजना बिजना की बहार - अब ऋतु . . . . . . . . . . . 6 - सोने की मेरी ऊची अटरिया पानन को चौपाल चन्दन को मेरो चौ बगला जा में हरियल बाग हरियल बाग की यो बिजना बिजना की बहार - अब ऋतु . . 7 - कोन दिशा तेरी ऊची अटरिया कौन दिशा चो पाल कौन द...