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होली नं0 - 55 (ठाडी जो हेरू बाट मेरो)

होली नं0 - 55  1-ठाडी जो हेरू बाट मेरो ,  सैंया निरमोहिया कब आवै  2- वनज करन पिया वन को सिधारे ,  सात समुन्दर पार मेरो - सैंया . . . .  3- सोच समझू मैं घर में बैठी  पिया गये प्रदेश मेरो - सैंया . . . . .  4- जब से गये पिया घर नही आये ,  हमरो जो मन जाय मेरो - सैंया . . . . .  5-मेरे बालम के अंगना में ,  दाहिनों वोले काग मेरो - सैंयां . . . . .  6-कौन पंन्डीत पातियो लेखे हो पातिया ,  कौन संन्देशा ले जाय मेरो - सैंयां . . . . .  7 - सुवा पण्डित पातीया लेखे हो पातिया  काग संन्देशा ले जाय मेरो - सैंया . . . . .  8 - काहे को कागज बनाऊ ,  काहे बनाऊ स्याही मेरो - सैंया . . . . .   9 - अनचल फाड़ी कागज बनाऊ ,  सुरमा पौंछी के स्याही मेरो - सैंया . . . . .  10 - जब मेरे पिया घर आयेगे ,  पिया को हृदय लगाय मेरो  सैंयां निरमोहिया कब आवे ।