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होली नं0 - 41 (हाँ जी राधे यमुना अकेली मत जय्या)

होली नं0 - 41  1-हाँ जी राधे यमुना अकेली मत जय्या  वही रहें चित चोर राधे - यमुना अकेली ... 2-बन्शी वट से आन मिलो है ,  सुन्दर श्याम स्वरूप राधे - यमुना अकेली ... 3-पान खाई मुख मुरली बजाई ,  अनचल प्रेम लगाई राधे - यमुना अकेली ... 4-अंगूठी पकड़ मेरी बय्यां मरोरी ,  खीचत लम्बी चीर राधे - यमुना अकेली ... 5-अनचल लूटी कदम चड़ी बैठे ,  हंसी हंसी बात कराई राधे - यमुना अकेली ... 6-मांगे अनचल देवत नाही ,  गोपी रहे सरमाय राधे  यमुना अकेली मत जैयौ वही रहे चित चोर  ।।।श्री कृष्ण कन्हया लाल की जै ।।