मैं कमल चंद्र भट्ट पुत्र स्व0 श्री केदार दत्त
ग्राम झड़गाँव मल्ला कुमाऊँनी होली जो वास्तविक रूप से श्री पान सिंह मेहता द्वारा प्रकाशित पुस्तक है से डिजिटल रूप में परिवर्तित कर रहा हूँ
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होली नं0 - 18 ( तुम सुन लीजो अवतार चतुर भुज सुन लीजो)
होली नं0 - 23 1- अच्छ हाँ रे सीता वन में , अकेली कैसे रही 2- कैसे रही दिन रात सीता वन में , अकेली कैसे रही 3-अच्छ हॉ रे सीता रंग महल को छोड़ चली , वन में कुटिया रमाय - सीता 4-अच्छ हॉ रे सीता सौड़ सुवेद को छोड़ चली , वन में पतिया विछाय - सीता 5-अच्छ हाँ रे सीता सट रस भोजन छोड़ चली , वन में वन फल खाय - सीता 6- अच्छ हाँ रे सीता हस्ति घोड़ा छोड़ चली , वन में सिंह डराय - सीता 7 - अच्छ हाँ रे सीता साज सहेली छोड़ चली , वन में दूत डराय - सीता 8-अच्छ हॉ रे सीता तेल फूलेल छोड़ चली , वन में जटायें रमाय - सीता वन में अकेली कैसे रही कैसे रही दिन - रात - सीता वन में अकेली कैसे रही ।
होली नं0 - 37 1- लागी गयो है बाण रानी दशरथ मछली छेदन में 2-एक समय सुन रानी सयानी , मृगया की मन ठानी रानी - दशरथ मछली . . . 3- वन में जाय सरोवर देखा , बैठ किनारे जाय रानी - दशरथ मछली 4- ताही समय श्रवण वहां पहुचे , लेने निरमल नीर रानी - दशरथ मछली . . . 5 - घड़ा डुबाया ज्यों ही जल में , शब्द घड़े का होय रानी - दशरथ मछली . . . 6 - मृग आना जाना मन में , खीच के मारा बाण रानी - दशरथ मछली . . . 7 - श्रवणा कुंवर को बाण लगो है , हा - हा शब्द सुनाय रानी - दशरथ मछली . . . 8 - ताही समय श्रवण वहाँ पहुचें , पूछा सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . . 9 - मातु पिता का एक सहारा , लेने आया नीर रानी - दशरथ मछली . . . 10 - जा के कहियो मातु पिता से , श्रवण मरी यो जाय रानी - दशरथ मछली . . . 11 - पानी ले के दशरथ पहुचे , बोले सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . 12 - पुत्र वियोग में हम मरते हैं , सो दुख व्यापै तोही रानी - दशरथ मछली . . . 13 - पुष्प विमान में तीनो बैठे , सी...
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