सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

होली नं0 - 39 (कुण्डल पुर के राजा भीस्मक)

होली नं0 - 39 

1-कुण्डल पुर के राजा भीस्मक , 
कुण्डल पुर . . . . . . . 

2 - ता घर उपजी कन्या , 
रूकमणी नाम कहाय - कुण्डल पर 

3 - उसी शहर में अदबिच , 
देवी का मन्दिर होय - कुण्डल पर . . 

4-नित उठ नहा के कन्या , 
देवी को पूजन जाय - कुण्डल पुर . . . . 

5-पिता कहे में बेटी , 
ब्याहूगा शिशुपाल - कुण्डल पुर . . . . . 

6-भाई कहे मै बहिना 
ब्याहूगा कृष्ण कुमार - कुण्डल पुर . . . . . 

7-नित उठ कन्या जेपै 
कृष्ण कन्हया जाल - कुण्डल पुर . . . . . . 

8-कृष्णा रूकमणी होवै , 
युग युग के अवतार 
कुण्डल पुर के राजा भीष्मक नाम कहाय

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली नं0 - 45 (उठ मिल हो भरत रधुवर आये)

होली नं0 - 45 1 - उठ मिल हो भरत रधुवर आये ,  उठ मिल हो भरत रधुवर आये  2 - सूरजा आये चन्दा आये ,  तारे जो आये गगन चड़के - उठ . . . .  3 - राम जी आये लछिमन आये ,  सीता जी आयी रथ चढ़ के - उठ . . . . .  4 - ब्रह्मा जी आये विश्नू जी आये ,  शंभू आये बहल चढ़के - उठ . . . . .  5-कहां - कहां भाई विपत गवाई ,  कौन पुरी में सुख पाई - उठ . . . . .   6 बन - बन में भाई विपत गवाई ,  अयोध्या पुरी में सुख पाई - उठ . . . .  उठ मिल हो भरत रधुवर आये ।

होली नं0 - 23 (अच्छ हाँ रे सीता वन में , अकेली कैसे रही)

होली नं0 - 23 1- अच्छ हाँ रे सीता वन में ,  अकेली कैसे रही  2- कैसे रही दिन रात सीता वन में ,  अकेली कैसे रही  3-अच्छ हॉ रे सीता रंग महल को छोड़ चली ,  वन में कुटिया रमाय - सीता  4-अच्छ हॉ रे सीता सौड़ सुवेद को छोड़ चली ,  वन में पतिया विछाय - सीता  5-अच्छ हाँ रे सीता सट रस भोजन छोड़ चली ,  वन में वन फल खाय - सीता 6- अच्छ हाँ रे सीता हस्ति घोड़ा छोड़ चली ,  वन में सिंह डराय - सीता 7 - अच्छ हाँ रे सीता साज सहेली छोड़ चली ,  वन में दूत डराय - सीता  8-अच्छ हॉ रे सीता तेल फूलेल छोड़ चली ,  वन में जटायें रमाय - सीता  वन में अकेली कैसे रही  कैसे रही दिन - रात - सीता  वन में अकेली कैसे रही ।

होली नं0 - 37 ( लागी गयो है बाण रानी)

होली नं0 - 37  1- लागी गयो है बाण रानी  दशरथ मछली छेदन में  2-एक समय सुन रानी सयानी ,  मृगया की मन ठानी रानी - दशरथ मछली . . .  3- वन में जाय सरोवर देखा ,  बैठ किनारे जाय रानी - दशरथ मछली  4- ताही समय श्रवण वहां पहुचे ,   लेने निरमल नीर रानी - दशरथ मछली . . .  5 - घड़ा डुबाया ज्यों ही जल में ,  शब्द घड़े का होय रानी - दशरथ मछली . . .  6 - मृग आना जाना मन में ,  खीच के मारा बाण रानी - दशरथ मछली . . . 7 - श्रवणा कुंवर को बाण लगो है ,  हा - हा शब्द सुनाय रानी - दशरथ मछली . . .  8 - ताही समय श्रवण वहाँ पहुचें ,  पूछा सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . .  9 - मातु पिता का एक सहारा ,  लेने आया नीर रानी - दशरथ मछली . . .  10 - जा के कहियो मातु पिता से ,  श्रवण मरी यो जाय रानी - दशरथ मछली . . .  11 - पानी ले के दशरथ पहुचे ,  बोले सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . .  12 - पुत्र वियोग में हम मरते हैं , सो दुख व्यापै तोही रानी - दशरथ मछली . . .  13 - पुष्प विमान में तीनो बैठे ,  सी...