श्री विष्णूपति होली
सुमिरो सीता राम रंम भज रंम भज राधे ।2 - इक पेड़ जो जनमें मथुरा जी में, जड़ जागे जगनाथ ।
फूल फूले द्वारिका जी में , फल पाके बद्रीनाथ
राम भज . . . . . .
3 - काहे की गड लंका है रे काहे को कैलाश
काहे की यो अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम -
4 - सोने की गड़ लंका है रे , पत्थर को कैलाश
पानन की अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम
5 - कौन दिशा गड लंका है रे , कौन दिशा कैलाश
कौन दिशा अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम
6 - दक्षिण दिशा गड़ लंका है रे उत्तर दिशा कैलाश पूरब दिशा अयोध्या नगरी जा में ठाड़े राम
7 - कौन बसे गड़ लंका है , रे कौन बसे कैलाश कौन बसे अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम
8 - रावण बसे गड़ लंका है रे शिवजी बसे कैलाश
दशरथ की अयोध्या नगरी जा में ठाडे राम
9 - सोने चाँदी को रथ बनवायो जा में बैठे राम
लछिमन , भरत , शत्रुघ्न - माता कौशल्या - पिता दशरथ
संग में जानकी होय - राम भज . .
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