मैं कमल चंद्र भट्ट पुत्र स्व0 श्री केदार दत्त
ग्राम झड़गाँव मल्ला कुमाऊँनी होली जो वास्तविक रूप से श्री पान सिंह मेहता द्वारा प्रकाशित पुस्तक है से डिजिटल रूप में परिवर्तित कर रहा हूँ
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होली नं0 - 53 (खिड़िकियो पर ठाडो देख राधे लौडा बजा गयो बासुरिया) लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं
होली नं0 - 53 1 - खिड़िकियो पर ठाडो देख राधे लौडा बजा गयो बासुरिया 2 - काहे की तेरी बासरिया हो बासरिया काहे को मेरा बेन राधे - लौडा . . . बजा गया बासुरिया - खिड़िकिया पर ठाड़ो नोट - ऊपर की होली के बोल है ।