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होली नं0 - 10 (इक हड़िया दो पेट हरजी)

होली नं0 - 10  1 - इक हड़िया दो पेट हरजी ,  चतुरही नारी श्रवण की ।  2 - इक दिन नारी मैत चली है ,  दो पेट हड़िया लाय हरजी - चतुरही  3 - इक में पाकै खट्टी मट्टरिया ,  इक में पाकै खीर हरजी - चतुरही  4 - सासु ससुर को खट्टी मट्टरिया ,  आफौं खावै खीर हरजी - चतुरही  5 - अन्धे अन्धौं ने बेटे से बोला ,  धन हमरी तकदीर हरजी - चतुरही  6 - बेटा तेरी सौ - सौ गैय्या ,  कभी ना खाई खीर हरजी - चतुरही  7 माता - पिता की बातें सुनकर ,  लगी विरह में पीर हरजी - चतुरही  8 - माता - पिता को खीर खिलाई ,  हम तब पिलवाया नीर हरजी - चतुरही  9 - श्रवण कुंवर ने नारी को त्यागा ,  आप बने तपधीर हरजी - चतुरही |