होली नं0 - 28 1- कहत मन्दोदरी नारी पिया तुम दे दो सिया सुन्दर नारी 2- तीनों लोक के हर्ता कर्ता , जिनकी नारी लाये पिया - तुम दे दो . . . . . . 3- राम पिता हैं जगत गुसांई , सीता जगत की माय पिया - तुम दे दो . . . . . 4- जिनका एक ही दूत जो आवै , सोने की लंका जलाय पिया - तुम दे दो . . . . . 5- अक्षय कुंवर को हाथ से खोया , करनी का फल पाय पिया - तुम दे दो . . . . . 6- जा सागर का गर्भ करत हैं , ता में पुल बधवाय पिया - तम दे दो . . . . . . 7- भक्त बिभीषण भाई तुम्हारा , उनके दल में जाय पिया - तुम दे दो . . . . . 8- हाट ही वाट को अंगद रोके , लौ घट रोके राम पिया - तुम दे दो . . . . . 9 - खुले किवाड़े लछिमन बैठे , कूद पड़े हनुमान पिया - तुम दे दो . . . . . 10 - हंसी - हंसी रावण बोलन लागे , नारिन को बहकाय पिया - तुम दे दो . . . . . 11 - मेघनाथ ही जो पुत्र हमारे , कुम्भ करण बल भाई पिया - तुम दे दो . . . . . 12 - भूप ही देश से पकड़ मगाऊँ वह तपस्वी दोनों भाई पिया - त...