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होली नं0 - 42 (तुम लौटी चलो घर जाय भरत)

होली नं0 - 42  1-तुम लौटी चलो घर जाय भरत ,  मेरी प्रजा को दु : ख मत दीजो 2- दोस नही कूछ मातु का भाई ,  कर्म में लिख दी बात - भरत मेरी .... 3- चौदह वरस तपस्या करके ,  जल्दी आ लौटी - भरत मेरी . . . .  4- ले हो भैया खड़ाऊ ले जा ,  तम हो दीन दयाल - भरत मेरी .  5-धन्य विधाता यह क्या कीन्हा ,  जग में प्ररलय होय - भरत मेरी . . . .  6-जाओ भरत तुम सेवा करना ,  जनता को सुख देत - भरत मेरी . . . .  7-विप्र भरत जी घर को लौटे ,  दुनिया को सुख देत - भरत मेरी . . .  8- मेरी प्रजा को दुख मत दीजो - तुम लौटि चलो घर जाय भरत मेरी प्रजा को दु : ख मत दीजो