होली नं0 - 27 1-हो मोहन नन्द लाल वर्षा न वन आये , 2- वर्षाने की ग्वाल गुजरिया कहाँ दही वेचन जाय , बीच मिले नन्द लाल अनचल दे पकड़ाय वर्षा ने वन आये - हो 3- बैठे कदम की छाया ग्वाला दे हो बुलाय , दूना दय्या दे चखवाय - वर्षा ने 4- काहे को तेरो चीरा है रे काहे लख है जडाय , काहे के माथे विराजे यो यशोदा को लाल 5- सोने को मेरो चीरा है रे , हीरा करव जड़ाय , कृष्णा के माथे विरजे यो यशोदा का लाल - वर्षा ने 6-गरजी - गरजी गोवर धन बरसे , बरसत मूशला धार , गोवर धन नख पर धारे , मेरे प्रण अधार -वर्षा ने बन आये - हो मोहन नन्द लाल वर्षा ने वस आये ।